My Past, Present and Future…..

Tuesday, 3 April 2012

कीमत

आज जब वो घर लौट रही थी तो काफी अँधेरा हो गया थावो ऑफिस में देर तक रुक गयी थी, काम कुछ ज्यादा थाऔर इसलिए वो थकी हुई थी और थोडा परेशान भीघर पहुचने पर उसने देखा की उसका आठ साल का बेटा दरवाजे पर खड़ा उसका इंतज़ार कर रहा थाबच्चे के चेहरे पर उदासी झलक रही थीउसने अपने बच्चे को गोद में लेना चाहापर इससे पहले उसका बेटा बोल पड़ा
बेटा: "माँ, मुझे तुमसे एक बात पूछनी है।"
उसने जवाब दिया: "हाँ हाँ, पूछोक्या बात है?"
"माँ, तुम्हारे एक घंटे की वेतन कितनी हैं?" बच्चे के चेहरे पर मासूमियत थी
उसको गुस्सा गयाएक तो आज वो पहले से ही बहुत ज्यादा थकी हुई थी उसपर बच्चे के ये बेहूदा सवालकाम का सारा गुस्सा उसने अपने बच्चे पर उतर दियागुस्से में वो बोली "इससे तुम्हे क्या मतलबतुमने ऐसा सवाल पुछा भी कैसे।"
"मै बस जानना चाहता थामाँ, बताओ ना, तुम एक घंटे में कितना कमा लेती हो।" बच्चे के चेहरे पर अब भी मासूमियत थी
"पचास रुपये"
"माँ, क्या तुम मुझे पच्चीस रुपये दे सकती हो?" बच्चे ने डरते हुए पुछावो अब भी निचे देख रहा था
उसका गुस्सा सातवे आसमान पर पहुँच गयावो आग-बबूला हो कर बोली, "अच्छा, तो तुम इसलिए मेरा वेतन पूछ रहे थेमै तुम्हे पच्चीस रुपये दूँ और कल तुम फिर एक बेकार खिलौना या कोई फालतू चीज खरीदोगेमेरे पास इन बेहूदा कामो के लिए पैसे नहीं हैंचलो, सीधे अपने कमरे में जाओ और जाकर पढाई करोमै इन व्यर्थ चीजो के लिए नौकरी नहीं करती।"
बच्चा चुपचाप अपने कमरे की तरफ चला गयाउसके चहरे पर अब भी उदासी थीउसने जाकर अपने कमरे का दरवाजा बंद कर लियावो भी अपने कमरे में आकर सोफे पर बैठ गयीकमरे में बहुत ज्यादा गर्मी और उमस थीउसने पंखा चला दियापर कमरे में उसका मन बेचैन हो रहा थावो बाहर बालकनी में आकर बैठ गयीशाम के समय बाहर ठंडी हवा चल रही थीउसके मन को थोडा सुकून मिलावो आँखे मूंद कर कुछ सोचने लगीउसके दिमाग में दिन भर का काम चल रहा थातभी उसे ध्यान आया की आज उसके बेटे ने ऐसा क्यों कियाउसे पैसे की क्या जरुरत थीआज से पहले तो उसने ऐसा नहीं किया था तो फिर आज क्या बात थीहो सकता है उसे पैसे की जरुरत किसी अच्छे काम के लिए होहो सकता है उसे कुछ जरुरी सामान खरीदना होअब उसका मन शांत हो चूका था और थकान भी कम हो गयी थीसो उसे अपने किये पर अफ़सोस हो रहा थाउसने सोचा, चल कर पूछ ले, आखिर बात क्या है
वो अपने बेटे के कमरे की तरफ गयी, जाकर दरवाजा खोलाबच्चा किताब खोलकर ऊपर देख रहा था और कुछ सोच रहा थाउसने बड़े प्यार से पुछा, "तुम्हे भूख तो नहीं लग रही।"
"नहीं" बच्चे ने सपाट सा जवाब दिया
वो उसके पास जाकर बैठ गयी और बोली, "मै उस समय थकी हुई थी और परेशान भी, सो तुम्हे डांट दियाये लो तुम्हारे पच्चीस रुपये।" कहते हुए उसने बच्चे को पच्चीस रुपये दे दिए
बच्चा सीधा बैठ गयाफिर उसने तकिये के निचे से कुछ पैसे निकालेउसने देखा की बच्चे के पास पहले से ही कुछ पैसे हैं, यह देखकर उसे फिर से गुस्सा गयाबच्चे ने धीरे से पैसे गिने और फिर अपनी माँ की तरफ देखा
"तुम्हारे पास जब पहले से ही पैसे थे तो फिर तुमने मेरे से पैसे क्यों मांगे।" उसका चेहरा सख्त हो गया था
"क्योकि मेरे पास पूरे पैसे नहीं थे पर अब हैं।" बच्चे ने जवाब दिया
"माँ, मेरे पास अब पचास रुपये हैंक्या मै तुमसे तुम्हारे एक घंटे खरीद सकता हूँमाँ, कल तुम एक घंटा पहले आनामै शाम को बहुत अकेला रहता हूँमुझे शाम में तुम्हारी जरुरत पड़ती है।"
वो अवाक् रह गयी, उसने अपने बेटे को अपने बाहों में भर लिए और उससे माफ़ी मांगने लगीउसकी आँखों से आंसू गिर रहे थे

वो अब जान चुकी थी, आज उसकी जरुरत उसके कंपनी से ज्यादा उसके बेटे को हैकल को होकर अगर वो मर जाती है तो उसकी कंपनी उसकी जगह किसी और को रख लेगीपर उसका बेटा हमेशा के लिए अकेला रह जायेगा, क्योकि वह उसके जगह किसी दुसरे को अपना माँ नहीं कह सकताआज उसे अपनी कीमत का एहसास हो चूका था

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