My Past, Present and Future…..

Friday, 28 September 2012

शायद हमारी किस्मत में यहीं है....

हम वो पत्ता नहीं जो आंधी के आने का इंतज़ार करे
हम तो वो हैं की ख़ामोशी टूटी और वहां जा गिरे
जहाँ ना गाँव, ना घर, ना खेत, ना खलिहान
वहां सिर्फ शैतान ही शैतान....
चोट लगी, दर्द हुआ और आवाज आई
"तेरी किस्मत में यहीं हैं...."

हम वो फूल नहीं जो कोई दुसरो को दे खुश कर सके
हम तो वो हैं जिसपर भौरे भी बैठने से नकारते हैं
सुगंधहीन, कुरूप और लाचार,
जो आख़िरकार गिर जाते हैं
दर्द तो होता है और आवाज आती है
"तेरी किस्मत में यहीं हैं...."

हम वो नहीं जो महलों में रहे, बगीचों में टहले
हम तो वो हैं जिसे दुनिया ना तो प्यार देती है,
और ना इज्जत देती है,
वो करती भी है तो सिर्फ दिखावा
चोट दिल पे लगती है और दर्द बहुत होता है,
और फिर आवाज आती हैं
"तेरी किस्मत में यहीं है...."

ये दुनिया न तो बढ़ते देख सकती है किसीको ना हम जैसो को उठते
परिवार का साथ नहीं, किसी का याद नहीं
हम तो वो हैं जिसे दुनिया पैर की गंदगी और फलो की गुठलियाँ समझती हैं
जिसे खाने के बाद फेंक दिया
दर्द बहुत होता है और फिर आवाज आती है
"तेरी किस्मत में यहीं है...."

क्यों ऐसी जिंदगी मिली जहाँ रुलाया जाता है
हर वक़्त हर क्षण एक लाचार और बेबस होने का एहसास दिलाया जाता है
वक़्त पड़ते सभी ऐसे नजरे फेर लेते हैं
जैसे हमने अपनी बदकिस्मती, खुद ही लिखी है
चोट दिल पर लगती है और फिर आवाज आती है
"तेरी किस्मत में यहीं है...."


सोचा हैं रब को भी देनी है हमें एक अर्जी
क्यों नहीं होती है पूरी हमारी कोई मर्जी,
हार चुकी हु मै अपनी जिंदगी, ऐसी किस्मत से
वहीँ हो जाता है दूर जिसे जोड़ना चाहती हूँ अपने जीवन से
कोई उम्मीद नहीं रखना अब इस दुनिया से
कई चुनौतियों और ठोकरों से रु-ब-रु होते होते
शायद अब मैंने ये समझ लिया है
चोट दिल पर लगती है, दर्द बहुत होता है
और फिर समझ आती है
"शायद हमारी किस्मत में यहीं है...."

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